

॥ १ ॥ वक्रतुण्ड गणेश मन्त्र ॥
श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
॥ २ ॥ गणेश शुभ-लाभ मन्त्र ॥
ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये।
वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः॥
॥ ३ ॥ गणेश गायत्री मन्त्र ॥
ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
॥ ४ ॥ श्री महागणपति मूल मन्त्र ॥
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये।
वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥
॥ ५ ॥ ऋणहर्ता गणपति मन्त्र ॥
ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट्॥
॥ ६ ॥ हरिद्रा गणपति मन्त्र ॥
ॐ हुं गं ग्लौं हरिद्रा गणपतये वर वरद।
सर्व जन हृदयं स्तम्भय-स्तम्भय स्वाहा॥
॥ ७ ॥ हेरम्ब गणपति मन्त्र ॥
ॐ नमो हेरम्ब मदमोहित।
मम सङ्कटान् निवारय निवारय स्वाहा॥
॥ ८ ॥ गणेश एकाक्षरी मन्त्र ॥
गं॥
॥ ९ ॥ गणेश षडाक्षर मन्त्र ॥
ॐ वक्रतुण्डाय हुम्॥
॥ १० ॥ गणेश अष्टाक्षर मन्त्र ॥
ॐ गं गणपतये नमः॥
॥ ११ ॥ क्षिप्र प्रसाद गणपति मन्त्र ॥
गं क्षिप्रप्रसादनाय नमः॥
श्रद्धा, विश्वास और भक्तिभाव से भगवान श्री गणेश के मन्त्रों का जप करने से मन को शांति, बुद्धि को प्रकाश और जीवन को शुभ दिशा प्राप्त होती है।
श्री गणेश के मन्त्र भगवान के विभिन्न स्वरूपों और शक्तियों का स्मरण कराते हैं। वक्रतुण्ड मन्त्र विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना है, गायत्री मन्त्र बुद्धि और ज्ञान का आह्वान करता है, तथा मूल मन्त्र भक्त को गणपति के चरणों में समर्पित करता है। इन मन्त्रों का जप मन को स्थिर करता है और भक्त के भीतर श्रद्धा, साहस, विवेक तथा सकारात्मक ऊर्जा का विकास करता है।
महागणपति, ऋणहर्ता, हरिद्रा और हेरम्ब गणपति मन्त्र विशेष साधना से जुड़े हुए मन्त्र माने जाते हैं। इनका जप करते समय शुद्ध उच्चारण, नियम, श्रद्धा और संयम का पालन करना चाहिए। बीज मन्त्रों और विशेष तान्त्रिक मन्त्रों का अभ्यास योग्य गुरु या आचार्य के मार्गदर्शन में करना अधिक उचित माना जाता है।
भगवान श्री गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि के दाता, प्रथम पूज्य और मंगलमूर्ति कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले उनका स्मरण करने की परम्परा है। वे भक्तों के जीवन से बाधाओं को दूर करके ज्ञान, सफलता, समृद्धि, सुरक्षा और शुभ आरम्भ का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
भगवान श्री गणेश की भक्ति हमें सिखाती है कि बुद्धि, विनम्रता, धैर्य और माता-पिता का सम्मान जीवन की महान शक्तियां हैं। जब भक्त अपने सभी कार्यों को प्रभु के चरणों में समर्पित करके आगे बढ़ता है, तब भय और संदेह कम होने लगते हैं। गणेश नाम का स्मरण जीवन में ज्ञान, शांति, शुभता और आत्मबल का प्रकाश भर देता है।
हे गणपति महाराज,
आप विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति हैं।
मेरे जीवन के सभी कष्ट, ऋण, भय और बाधाएं दूर कीजिए।
मुझे बुद्धि, विवेक, धैर्य और सत्य के मार्ग पर चलने की शक्ति दीजिए।
मेरे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखिए और सभी के जीवन में सुख-शांति भर दीजिए।
॥ जय श्री गणेश ॥
🌺 गणपति बप्पा मोरया 🌺
मंगल मूर्ति मोरया