

जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु भगवान की सम्पूर्ण आरती
भगवान श्री विष्णु को सनातन परंपरा में जगत के पालनहार और भगवान त्रिदेवों में से एक माना जाता है। वे धर्म, सत्य, शांति, करुणा और संरक्षण के स्वरूप हैं। श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान विष्णु जी की आरती करने से भक्त उनके दिव्य स्वरूप का स्मरण करते हैं तथा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मकता की प्रार्थना करते हैं।
ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट
क्षण में दूर करे
जो ध्यावे फल पावे
दुःख बिनसे मन का
स्वामी दुःख बिनसे मन का
सुख सम्पत्ति घर आवे
कष्ट मिटे तन का
मात-पिता तुम मेरे
शरण गहूँ किसकी
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी
तुम बिन और न दूजा
आस करूँ मैं जिसकी
तुम पूरण परमात्मा
तुम अन्तर्यामी
स्वामी तुम अन्तर्यामी
पारब्रह्म परमेश्वर
तुम सबके स्वामी
तुम करुणा के सागर
तुम पालनकर्ता
स्वामी तुम पालनकर्ता
मैं मूरख खल कामी
कृपा करो भर्ता
तुम हो एक अगोचर
सबके प्राणपति
स्वामी सबके प्राणपति
किस विधि मिलूँ दयामय
तुमको मैं कुमति
दीनबंधु दुःखहर्ता
तुम रक्षक मेरे
स्वामी तुम रक्षक मेरे
अपने हाथ उठाओ
द्वार पड़ा तेरे
विषय विकार मिटाओ
पाप हरो देवा
स्वामी पाप हरो देवा
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ
संतन की सेवा
ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट
क्षण में दूर करे
भगवान विष्णु जी की आरती में उन्हें जगत का पालन करने वाला, करुणा और दया का सागर तथा अपने भक्तों के संकट दूर करने वाला परमात्मा बताया गया है। भक्त इस आरती के माध्यम से भगवान विष्णु से सुख-समृद्धि, शांति, रक्षा और सही मार्ग पर चलने की प्रार्थना करते हैं। आरती में भक्त अपने मन के विकार और पाप दूर करने तथा भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति बढ़ाने की कामना करता है।
मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने में आध्यात्मिक रूप से सहायक मानी जाती है।
भगवान विष्णु के प्रति श्रद्धा, भक्ति और विश्वास मजबूत होता है।
परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना के लिए आरती की जाती है।
नकारात्मक विचारों से मन को दूर रखने और आध्यात्मिक एकाग्रता बढ़ाने में सहायता मिलती है।
कठिन परिस्थितियों में भगवान के प्रति विश्वास और धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।
नियमित पूजा-पाठ से मन में सेवा, धर्म और सदाचार की भावना विकसित करने की प्रेरणा मिलती है।
भगवान विष्णु जी की आरती प्रातःकाल और संध्या समय श्रद्धा के साथ की जा सकती है। विशेष रूप से गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा और आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। भक्त स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें, पूजा स्थान पर दीपक जलाएं और शांत मन से भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए आरती करें।
